अवधपुरी जैन मंदिर में हर्षोल्लास से मनाया गया दशलक्षण महापर्व, अनंत चतुर्दशी पर एक साथ हुईं 7 शांतिधाराएं

भोपाल। अवधपुरी स्थित श्री त्रिकाल चौबीसी दिगंबर जैन मंदिर, समन्वय नगर में दशलक्षण महापर्व श्रद्धा, भक्ति, तप और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दस दिनों तक मंदिर में भगवान जिनेंद्र का अभिषेक, शांतिधारा और सामूहिक पूजन से शुरू हुआ प्रति दिन सांय तक महारती व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जगमगाता रहा। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और पूरे परिसर में धर्म आराधना का वातावरण बना रहा।

दशलक्षण महापर्व के प्रत्येक दिन समाजजनों ने उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ-साथ अपने जीवन में संयम, त्याग और आत्मशुद्धि के भाव को अपनाने का संकल्प भी लिया।

अनंत चतुर्दशी पर एक साथ हुईं सात शांतिधाराएं

पर्व के दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। इस अवसर पर एक ही समय में सात शांतिधाराएं की गईं। मंत्रोच्चार और भगवान जिनेंद्र के जयकारों के बीच हुए इस विशेष अनुष्ठान के दौरान पूरा जिनालय भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

अनंत चतुर्दशी पर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया और बड़ी संख्या में समाजजन इस आयोजन में शामिल हुए। पर्व के अन्य दिनों में भी अलग-अलग समय पर प्रतिदिन तीन से चार शांतिधाराएं हुईं, जिसमें विभिन्न परिवारों और श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया।

कई श्रद्धालुओं ने की 9 और 10 दिन की कठिन तपस्या

महापर्व में तप और संयम का विशेष महत्व देखने को मिला। समाज के कई श्रावक-श्राविकाओं ने लगातार 9 और 10 दिनों तक उपवास रखकर कठिन तपस्या की। इसके अलावा अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास, एकासन और अन्य नियम-संयम भी धारण किए।

तपस्या पूर्ण करने वाले श्रद्धालुओं के प्रति समाजजनों ने अनुमोदना का भाव व्यक्त किया। दशलक्षण के इन दस दिनों में मंदिर केवल पूजा का केंद्र नहीं रहा, बल्कि तप, त्याग, संयम और आत्मचिंतन की साधना का स्थान भी बना रहा।

हर शाम अलग-अलग कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं

महापर्व के दौरान प्रतिदिन शाम को धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भी चली। इनमें धार्मिक अंताक्षरी, धार्मिक तंबोला, धार्मिक वेशभूषा, आरती की थाल सजाओ और रंगोली जैसी प्रतियोगिताओं में बच्चों, लाडू बनाओ प्रतियोगिता, भक्ताम्बर काव्य गायन प्रतियोगिता, इत्यादि ने हर वर्ग के व्यक्ति का जोश बाँधे रखा। इन आयोजनों के माध्यम से मनोरंजन के साथ धर्म ज्ञान और जैन संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रमों के माध्यम से दशलक्षण धर्म के सिद्धांतों, जैन संस्कृति और धार्मिक संस्कारों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म और परंपराओं से जोड़ना भी रहा। वही, नई परंपरा का उद्भूत करना भी।

दस दिनों तक अवधपुरी जैन मंदिर में सुबह अभिषेक, शांतिधारा और सामूहिक पूजन से लेकर शाम के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों तक उत्सव का माहौल बना रहा। एक ओर श्रद्धालुओं की कठिन तपस्या ने संयम और त्याग का संदेश दिया, वहीं सामूहिक धार्मिक आयोजनों ने समाज को एक सूत्र में जोड़े रखा।

रविवार को मनाया जाएगा क्षमावाणी पर्व

दशलक्षण महापर्व के बाद अब रविवार को अवधपुरी जैन मंदिर में क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर समाजजन एक-दूसरे से जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगेंगे और उत्तम क्षमा के भाव को जीवन में अपनाने का संदेश देंगे।